Item: Monkey (बंदर)

🔹 सामान्य परिचय

बंदर मानव के सबसे निकट संबंधी जानवरों में से एक है।
यह प्राइमेट (Primate) समूह का सदस्य है, यानी वही समूह जिससे मनुष्य (Human) का भी विकास हुआ है।
बंदर अपनी बुद्धिमत्ता, खेल-प्रेमी स्वभाव, और सामाजिक जीवन के लिए जाने जाते हैं।
वैज्ञानिक रूप से यह Cercopithecoidea और Platyrrhini नामक उपसमूहों में बँटे हैं —

पुराने विश्व के बंदर (Old World Monkeys): एशिया और अफ्रीका में पाए जाते हैं।

नए विश्व के बंदर (New World Monkeys): दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं।

🔹 भौतिक विशेषताएँ (Physical Features)

ऊँचाई: 25 सेंमी से 1 मीटर तक (प्रजाति पर निर्भर)

वजन: 1 किग्रा से 35 किग्रा तक

शरीर: लचीला, बालों से ढका हुआ, और लंबी पूँछ (tail) वाला।

चेहरा: मानव जैसा; आँखें आगे की ओर जिससे गहराई का अंदाज़ा लग सके।

हाथ: पकड़ने वाले — पेड़ों पर चढ़ने और खाने के लिए अनुकूलित।

दाँत: फल और पत्तियाँ चबाने के लिए उपयुक्त।

🔹 आवास (Habitat)

बंदर उष्णकटिबंधीय जंगलों, पहाड़ी इलाकों, सवाना, और यहाँ तक कि शहरी क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं।
भारत में बंदरों की कई प्रजातियाँ मिलती हैं — जैसे लंगूर, रीसस मकाक (Rhesus Macaque), बोनट मकाक आदि।

🔹 भोजन (Diet)

बंदर सर्वाहारी (Omnivore) हैं —
इनका भोजन बहुत विविध होता है:

फल, पत्तियाँ, बीज, फूल, कीड़े-मकोड़े, अंडे, और कभी-कभी छोटे जानवर।

इन्हें केले बहुत पसंद होते हैं, लेकिन वास्तव में जंगल में ये बहुत से अन्य फल भी खाते हैं।

🔹 व्यवहार और स्वभाव

बंदर अत्यंत सामाजिक जानवर हैं — झुंड (Troop) में रहते हैं, जिसमें नर, मादा और बच्चे शामिल होते हैं।

ये आपसी सफाई (Grooming) करते हैं — जिससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं।

बहुत बुद्धिमान होते हैं — औज़ारों का प्रयोग कर सकते हैं (जैसे पत्थर से फल तोड़ना)।

इनके चेहरे के भाव और आवाज़ से भावनाएँ (Emotion) झलकती हैं।

मानव की तरह इनमें जिज्ञासा और शरारत दोनों होती हैं।

🔹 प्रजनन (Reproduction)

मादा बंदर लगभग 5 से 7 महीने में बच्चे को जन्म देती है।

बच्चे को Infant कहा जाता है और वह माँ से चिपककर रहता है।

झुंड की मादाएँ मिलकर बच्चों की देखभाल करती हैं।

🔹 जीवनकाल (Lifespan)

औसतन 15 से 30 वर्ष तक।

कुछ बड़ी प्रजातियाँ कैद में 40 वर्ष तक जीवित रहती हैं।

🔹 रोचक तथ्य (Fun Facts)

बंदरों की 260 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

कुछ बंदर (जैसे कैपुचिन) सिक्के पहचानना और वस्तु विनिमय करना भी सीख सकते हैं।

लंगूर भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से पूजनीय माने जाते हैं (हनुमान जी से संबंध)।

बंदर अपने चेहरे के हावभाव से मुस्कुराहट, डर और गुस्सा व्यक्त कर सकते हैं।

कुछ बंदरों की पूँछ पकड़ने योग्य (Prehensile) होती है — यानी वे इससे पेड़ों की शाखाएँ पकड़ सकते हैं।


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