🔹 परिचय (Introduction):
सिरोस्ट्रेटस बादल ऊँचाई पर बनने वाले पतले, पारदर्शी परतदार बादल होते हैं।
ये आमतौर पर 6,000 से 13,000 मीटर (20,000–42,000 फीट) की ऊँचाई पर बनते हैं।
इनका निर्माण बर्फ़ के छोटे-छोटे क्रिस्टलों (ice crystals) से होता है, क्योंकि इस ऊँचाई पर तापमान बहुत कम होता है।
🔹 दिखावट (Appearance):
ये बादल पतली सफ़ेद चादर (milky veil) जैसे दिखते हैं जो पूरे या कुछ हिस्से में आकाश को ढक लेते हैं।
इनकी वजह से सूरज या चाँद के चारों ओर हल्का घेरा (halo) बनता है —
यह सिरोस्ट्रेटस बादलों की सबसे पहचानने योग्य विशेषता है 🌕✨
सूरज की रोशनी इनमें से आसानी से गुजर जाती है, इसलिए दिन में यह चमकीले परंतु धुंधले आकाश जैसा दृश्य बनाते हैं।
🔹 निर्माण (Formation):
जब नमी वाली हवा धीरे-धीरे ऊपर उठती है और बहुत ऊँचाई पर पहुँचकर ठंडी हो जाती है,
तो उसमें मौजूद जलवाष्प बर्फ़ के कणों में संघनित हो जाती है।
यह प्रक्रिया जेट धारा (Jet Stream) या ऊँचाई वाले गर्म-ठंडे वायु-मिश्रण के कारण होती है।
परिणामस्वरूप, बर्फ़ के कणों की पतली परत बन जाती है — जिसे हम सिरोस्ट्रेटस बादल कहते हैं।
🔹 मौसम पर प्रभाव (Weather Indication):
सिरोस्ट्रेटस बादल अक्सर आने वाले तूफ़ान या बारिश का संकेत देते हैं।
विशेषकर जब ये धीरे-धीरे पूरे आकाश में फैल जाते हैं,
तो यह संकेत होता है कि अगले 12 से 24 घंटों में निचले स्तर के वर्षा वाले बादल (जैसे Nimbostratus) आने वाले हैं।
इसलिए मौसम वैज्ञानिक इन्हें आने वाले बदलाव का अग्रदूत (harbinger of weather change) मानते हैं।
🔹 उपप्रकार (Subtypes):
Cirrostratus fibratus: पतले और रेशेदार रूप में फैले हुए बादल
Cirrostratus nebulosus: पूरी तरह फैली हुई चिकनी चादर जैसी परत — जिससे सूर्य या चाँद का प्रकाश हल्का धुंधला दिखता है
🔹 विशेष तथ्य (Interesting Facts):
“Cirrostratus” शब्द दो लैटिन शब्दों से बना है:
“Cirrus” = पतला रेशा
“Stratus” = परत
यानी पतली परत वाले ऊँचाई के बादल।
सिरोस्ट्रेटस बादलों से कभी बारिश नहीं होती, लेकिन ये वर्षा लाने वाले निंबस बादलों के आने का संकेत ज़रूर देते हैं।
ये अक्सर सिरस बादलों से विकसित होकर बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं।
सिरोस्ट्रेटस के कारण दिखने वाला halo effect (गोल घेरा) आइस क्रिस्टल्स में प्रकाश के अपवर्तन (refraction) से बनता है।
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