ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥
Arth:
हे देवकीनंदन गोविंद, हे जगत के पालनहार वासुदेव! मैं आपकी शरण में आया हूँ, कृपया मुझे अपने आशीर्वाद दें।
Uddeshya: परिवारिक सुख और मनोकामना पूर्ति के लिए।
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