परिचय:
भगवान गणेश जी हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय और प्रिय देवताओं में से एक हैं। उन्हें विघ्नहर्ता (अर्थात् बाधाओं को दूर करने वाले) और सिद्धि विनायक (अर्थात् सफलता देने वाले) कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या आराधना की शुरुआत गणेश जी के नाम से ही की जाती है।
जन्म कथा:
गणेश जी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर की मिट्टी से एक बालक की रचना की और उसे दरवाजे पर पहरा देने को कहा।
जब भगवान शिव वहाँ आए और अंदर जाना चाहा, तो उस बालक (गणेश जी) ने उन्हें रोक दिया। इससे क्रोधित होकर शिव जी ने अपने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया।
माता पार्वती अत्यंत दुखी हुईं, तब भगवान शिव ने उसे पुनर्जीवित करने का वचन दिया। उन्होंने अपने गणों को कहा कि किसी जीव का सिर लेकर आओ जो उत्तर दिशा की ओर मुँह करके सोया हो। गणों को एक हाथी का सिर मिला, जिसे लाकर उन्होंने गणेश जी के शरीर पर जोड़ दिया।
इस प्रकार गणेश जी का जन्म हुआ और उन्हें “गणों के ईश्वर” अर्थात् गणेश नाम मिला।
गणेश जी का स्वरूप:
गणेश जी का स्वरूप अत्यंत अद्वितीय है —
गणेश जी के नाम और अर्थ:
गणेश जी के कई नाम हैं, जिनमें प्रत्येक का विशेष अर्थ है:
गणेश चतुर्थी का महत्व:
गणेश जी का जन्मदिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है, जिसे गणेश चतुर्थी कहा जाता है।
यह पर्व पूरे भारत में, विशेष रूप से महाराष्ट्र में, बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोग गणेश जी की मूर्तियाँ घरों और पंडालों में स्थापित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और फिर विसर्जन के समय "गणपति बप्पा मोरया" के जयघोष के साथ उन्हें विदा करते हैं।
गणेश जी का आध्यात्मिक अर्थ:
गणेश जी हमें यह सिखाते हैं कि —
संक्षेप में:
गणेश जी केवल एक देवता नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक, विनम्रता और सफलता के प्रतीक हैं।
उनका नाम लेने मात्र से कार्य सफल होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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