काली मिट्टी को रेगुर मिट्टी (Regur Soil) या कपास वाली मिट्टी (Cotton Soil) भी कहा जाता है। यह मिट्टी अपने गहरे काले या धूसर रंग के कारण "काली मिट्टी" कहलाती है। इसका निर्माण ज्वालामुखीय चट्टानों के टूटने (अपक्षय) से हुआ है।
🏞️ कहाँ पाई जाती है?
काली मिट्टी मुख्य रूप से दक्कन पठार (Deccan Plateau) में पाई जाती है। इसमें निम्नलिखित राज्य शामिल हैं:
महाराष्ट्र
मध्य प्रदेश
गुजरात
आंध्र प्रदेश का कुछ हिस्सा
तमिलनाडु का उत्तरी भाग
🧪 मुख्य रासायनिक तत्व
काली मिट्टी में निम्न तत्व पाए जाते हैं:
लोहा (Iron) – पर्याप्त मात्रा में
एल्युमिनियम (Aluminium)
चूना (Lime)
मैग्नीशियम (Magnesium)
पोटाश (Potash) – अधिक मात्रा में
फॉस्फोरस, नाइट्रोजन और जैव पदार्थ (Humus) – अपेक्षाकृत कम
💧 भौतिक विशेषताएँ
इसका रंग गहरा काला या स्लेटी होता है।
इसमें जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity) बहुत अधिक होती है, क्योंकि यह चिकनी (Clayey) होती है।
सूखने पर यह मिट्टी सिकुड़ जाती है और उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
यह मिट्टी स्वाभाविक रूप से उपजाऊ होती है।
🌾 मुख्य फसलें
काली मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, इसलिए यह निम्न फसलों के लिए सर्वोत्तम है:
कपास (Cotton)
सोयाबीन
चना (Gram)
गेहूँ (Wheat)
ज्वार (Sorghum)
मक्का (Maize)
गन्ना (Sugarcane)
🌦️ जलवायु
काली मिट्टी उष्ण और अर्ध-शुष्क जलवायु में पाई जाती है।
औसत तापमान: 25°C से 35°C तक
वर्षा: लगभग 50–100 सेमी प्रति वर्ष
अधिक वर्षा से यह मिट्टी चिकनी होकर जलभराव कर सकती है।
🧑🌾 कृषि महत्व
यह मिट्टी भारत की कपास उत्पादन का प्रमुख आधार है।
इसकी जल धारण क्षमता के कारण यह सूखा प्रतिरोधी मिट्टी मानी जाती है।
सिंचाई होने पर यह अन्य फसलों के लिए भी बहुत उपयुक्त बन जाती है।