🌍 परिचय
लेटराइट मिट्टी (Laterite Soil) शब्द लैटिन शब्द “Later” से लिया गया है, जिसका अर्थ है ईंट (Brick)।
इस मिट्टी का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह सूखने पर ईंट जैसी कठोर हो जाती है।
यह मिट्टी अधिक वर्षा और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में बनती है।
लगातार वर्षा के कारण मिट्टी से पोषक तत्व बह जाते हैं (Leaching Process), जिससे इसमें लोहे और एल्युमिनियम की मात्रा अधिक रह जाती है।
🏞️ कहाँ पाई जाती है?
लेटराइट मिट्टी भारत के दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में पाई जाती है:
🧪 मुख्य रासायनिक तत्व
👉 इस कारण यह मिट्टी प्राकृतिक रूप से कम उपजाऊ होती है, लेकिन उचित खाद और सिंचाई से खेती योग्य बन सकती है।
💧 भौतिक विशेषताएँ
🌦️ जलवायु
लेटराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय और उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।
🌾 मुख्य फसलें
लेटराइट मिट्टी में खाद डालने पर निम्न फसलें अच्छी होती हैं:
🧑🌾 कृषि महत्व
⚠️ समस्याएँ
✅ संरक्षण और सुधार उपाय
📘 सारांश तालिका
| गुण | विवरण |
|---|---|
| रंग | लाल, भूरा या पीला |
| निर्माण | अधिक वर्षा से लीचिंग की प्रक्रिया द्वारा |
| जल धारण क्षमता | कम |
| उपजाऊपन | कम (खाद डालने पर बढ़ती है) |
| मुख्य फसलें | चाय, कॉफी, रबर, काजू |
| प्रमुख राज्य | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
0 peoples found it helpful.
We could not find any comments on this item