Item: Laterite Soil लेटराइट मिट्टी

🌍 परिचय

लेटराइट मिट्टी (Laterite Soil) शब्द लैटिन शब्द “Later” से लिया गया है, जिसका अर्थ है ईंट (Brick)
इस मिट्टी का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह सूखने पर ईंट जैसी कठोर हो जाती है।

यह मिट्टी अधिक वर्षा और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में बनती है।
लगातार वर्षा के कारण मिट्टी से पोषक तत्व बह जाते हैं (Leaching Process), जिससे इसमें लोहे और एल्युमिनियम की मात्रा अधिक रह जाती है।

🏞️ कहाँ पाई जाती है?

लेटराइट मिट्टी भारत के दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में पाई जाती है:

  • केरल
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल
  • झारखंड
  • असम
  • महाराष्ट्र का पश्चिमी भाग

🧪 मुख्य रासायनिक तत्व

  • लोहा (Iron Oxide) – बहुत अधिक
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड (Aluminium Oxide) – अधिक
  • नाइट्रोजन (Nitrogen) – बहुत कम
  • पोटाश, फॉस्फोरस, चूना (Potash, Phosphorus, Lime) – कम मात्रा में

👉 इस कारण यह मिट्टी प्राकृतिक रूप से कम उपजाऊ होती है, लेकिन उचित खाद और सिंचाई से खेती योग्य बन सकती है।

💧 भौतिक विशेषताएँ

  1. रंग – लाल, भूरा या पीला।
  2. सूखने पर ईंट जैसी कठोर हो जाती है।
  3. बनावट – मध्यम से लेकर मोटी (Coarse to Fine)।
  4. जल धारण क्षमता – कम।
  5. ह्यूमस (Humus) की मात्रा – बहुत कम।

🌦️ जलवायु

लेटराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय और उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।

  • तापमान: लगभग 25°C – 35°C
  • वर्षा: 200 से 300 सेमी तक प्रति वर्ष

🌾 मुख्य फसलें

लेटराइट मिट्टी में खाद डालने पर निम्न फसलें अच्छी होती हैं:

  • चाय (Tea)
  • कॉफी (Coffee)
  • काजू (Cashew nuts)
  • नारियल (Coconut)
  • केला (Banana)
  • रबर (Rubber)
  • धान (Rice) – कुछ स्थानों पर

🧑‍🌾 कृषि महत्व

  • यह मिट्टी बागान फसलों (Plantation Crops) के लिए उपयुक्त है।
  • पश्चिमी घाट और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में इस मिट्टी से भारत को कॉफी और चाय का अच्छा उत्पादन मिलता है।
  • यह मिट्टी ईंट बनाने में भी काम आती है, क्योंकि सूखने पर सख्त हो जाती है।

⚠️ समस्याएँ

  1. पोषक तत्वों की कमी (Leaching के कारण)।
  2. जल धारण क्षमता कम।
  3. लगातार वर्षा से मिट्टी का अपरदन।
  4. खेती के लिए खाद और सिंचाई की आवश्यकता अधिक।

संरक्षण और सुधार उपाय

  • जैविक खाद और गोबर की खाद डालें।
  • टेरेस फार्मिंग (सीढ़ीनुमा खेती) अपनाएँ।
  • पेड़ लगाकर मिट्टी का कटाव रोकें।
  • फसल चक्र अपनाएँ।
  • जल निकासी और सिंचाई की व्यवस्था करें।

📘 सारांश तालिका

गुणविवरण
रंगलाल, भूरा या पीला
निर्माणअधिक वर्षा से लीचिंग की प्रक्रिया द्वारा
जल धारण क्षमताकम
उपजाऊपनकम (खाद डालने पर बढ़ती है)
मुख्य फसलेंचाय, कॉफी, रबर, काजू
प्रमुख राज्यकेरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल

This item is added in these collections

Did you find it helpful?

0 peoples found it helpful.

We could not find any comments on this item