Item: Section 30 धारा 30 – “मूल्यवान सुरक्षा” (Valuable Security)

ऐसा लिखित दस्तावेज़ जिससे किसी व्यक्ति को कोई अधिकार, संपत्ति या लाभ
प्राप्त होता है या छीना जा सकता है।

 

उदाहरण:
चेक, प्रोमिसरी नोट, डीड, या बांड — ये सभी “Valuable Security” कहलाते हैं।


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Shyam Dubey said, on 08 Nov 2025 at 08:50

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 30 में "मूल्यवान प्रतिभूति" (Valuable Security) की परिभाषा दी गई है। इस धारा के अनुसार, मूल्यवान प्रतिभूति शब्द उस दस्तावेज के लिए प्रयुक्त होता है जो ऐसा दस्तावेज है या ऐसा दिखाया गया है, जिसके द्वारा कोई कानूनी अधिकार बनाया जाता है, बढ़ाया जाता है, स्थानांतरित किया जाता है, सीमित किया जाता है, खत्म किया जाता है या छोड़ा जाता है, या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति कानूनी दायित्व को स्वीकार करता है। यह दस्तावेज़ किसी भी प्रकार के कानूनी या वित्तीय प्रभाव को उत्पन्न करता है।संक्षेप में, धारा 30 के तहत कोई भी दस्तावेज जिसे कानूनी अधिकारों या दायित्वों के सृजन, हस्तांतरण या संशोधन के लिए उपयोग किया जाता है, उसे "मूल्यवान प्रतिभूति" माना जाता है। यदि किसी ने ऐसे दस्तावेज़ की जालसाजी, छेड़छाड़ या दुरुपयोग किया, तो वह गंभीर आपराधिक अपराध बनता है।यह धारा जालसाजी, धोखाधड़ी और धोखाधड़ी से संबंधित आपराधिक अपराधों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार प्रदान करती है।यह ध्यान देने योग्य है कि संविधान के अनुच्छेद 30 का विषय अलग है, जिसमें अल्पसंख्यकों के शैक्षिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार दिया गया है, जो दंड संहिता की धारा 30 से अलग है।

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