कोई कार्य यदि स्वयं में ही अपराध है,
तो यह मायने नहीं रखता कि उसने किसी को नुकसान पहुँचाया या नहीं —
वह फिर भी अपराध माना जाएगा।
🔹 उदाहरण:
आत्महत्या का प्रयास (धारा 309) —
इसमें किसी दूसरे को कोई हानि नहीं होती,
लेकिन फिर भी यह अपराध है क्योंकि कानून में इसे अपराध घोषित किया गया है।
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