🔹 परिचय:
डेंगू वायरस एक RNA वायरस है जो Aedes aegypti नामक मच्छर के काटने से फैलता है।
यह वायरस फ्लैविवायरस (Flavivirus) समूह से संबंधित है।
डेंगू को कभी-कभी “हड्डी तोड़ बुखार (Breakbone Fever)” भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर और जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है।
🔹 प्रकार:
डेंगू वायरस के चार प्रमुख प्रकार (serotypes) हैं:
DEN-1
DEN-2
DEN-3
DEN-4
इनमें से किसी एक प्रकार से संक्रमित होने पर उस वायरस से प्रतिरोधकता बन जाती है,
लेकिन बाकी तीन से दोबारा संक्रमण हो सकता है।
🔹 संक्रमण का तरीका:
जब एक मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का खून चूसता है, तो वायरस मच्छर के शरीर में चला जाता है।
वही मच्छर जब किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उस व्यक्ति के रक्त में प्रवेश कर जाता है।
वायरस रक्त कोशिकाओं में फैलकर शरीर में संक्रमण करता है।
🔹 लक्षण:
डेंगू के लक्षण आम तौर पर संक्रमण के 4–10 दिन बाद दिखते हैं:
| सामान्य लक्षण | गंभीर लक्षण |
|---|---|
| तेज बुखार (104°F तक) | रक्तस्राव (Bleeding gums/nose) |
| सिरदर्द | पेट में तेज दर्द |
| जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द | उल्टी, कमजोरी |
| त्वचा पर लाल चकत्ते (rashes) | रक्त प्लेटलेट्स की संख्या कम होना (Thrombocytopenia) |
🔹 डेंगू के प्रकार:
सामान्य डेंगू (Classical Dengue) – बुखार और दर्द तक सीमित।
डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) – रक्तस्राव और प्लेटलेट्स कम होना।
डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) – गंभीर स्थिति, जानलेवा हो सकती है।
🔹 बचाव:
🛡️ डेंगू से बचाव का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों से बचाव है:
मच्छरदानी और रैपेलेंट (mosquito repellent) का उपयोग।
पानी जमा न होने दें (जैसे टायर, गमले, बाल्टी आदि में)।
पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनें।
दिन के समय भी सतर्क रहें, क्योंकि Aedes मच्छर दिन में काटता है।
🔹 इलाज:
डेंगू का कोई विशेष इलाज (specific antiviral) नहीं है।
आराम, पर्याप्त पानी, और प्लेटलेट्स की निगरानी ज़रूरी है।
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