🔹 परिचय:
Rabies virus एक RNA वायरस है जो कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़ या अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने से फैलता है।
यह वायरस मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर सीधा हमला करता है।
अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह लगभग 100% घातक (fatal) होता है।
🔹 वर्गीकरण:
परिवार (Family): Rhabdoviridae
वंश (Genus): Lyssavirus
आकृति: गोल या गोलियों जैसी (bullet-shaped) संरचना होती है।
🔹 संक्रमण का तरीका:
जब कोई संक्रमित जानवर (जैसे कुत्ता) काटता है, तो उसकी लार (saliva) में मौजूद वायरस घाव के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।
यह धीरे-धीरे नसों (nerves) के जरिए मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (spinal cord) तक पहुँचता है।
मस्तिष्क में पहुँचने के बाद यह सूजन और नुकसान करता है, जिससे व्यक्ति को दौरे, डर, और लकवा हो सकता है।
🔹 लक्षण:
रेबीज़ के लक्षण संक्रमण के 1 से 3 महीने बाद तक भी दिखाई दे सकते हैं।
प्रारंभिक लक्षण:
बुखार
काटे हुए स्थान पर दर्द या जलन
सिरदर्द और थकान
अग्रिम लक्षण:
पानी से डर लगना (Hydrophobia)
हवा या आवाज़ से डर लगना (Aerophobia)
अत्यधिक बेचैनी
निगलने में कठिनाई
दौरे और लकवा
एक बार लक्षण प्रकट हो जाएँ तो मृत्यु लगभग निश्चित होती है।
🔹 बचाव:
💉 टीकाकरण (Vaccination) ही रेबीज़ से बचाव का एकमात्र उपाय है।
अगर कुत्ता काट ले तो तुरंत ये कदम उठाएँ 👇
घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोएँ।
किसी भी एंटीसेप्टिक (जैसे Dettol) से साफ करें।
निकटतम अस्पताल जाएँ और Anti-Rabies Vaccine (ARV) लगवाएँ।
कुछ मामलों में Rabies Immunoglobulin (RIG) भी लगाया जाता है।
🔹 रोकथाम के उपाय:
आवारा जानवरों से दूरी बनाए रखें।
अपने पालतू जानवरों को रेबीज़ का टीका ज़रूर लगवाएँ।
अगर कोई जानवर काट ले तो इलाज में देरी न करें।
🔹 विशेष तथ्य:
रेबीज़ का नाम लैटिन शब्द “Rabere” से आया है, जिसका अर्थ है “पागलपन या उन्माद”।
यह वायरस सिर और मस्तिष्क तक जितनी जल्दी पहुँचता है, उतना ही घातक होता है।
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