🔹 परिचय:
Poliovirus एक RNA वायरस है जो पोलियोमायलाइटिस (Poliomyelitis) नामक बीमारी का कारण बनता है।
यह रोग मुख्य रूप से बच्चों (children) को प्रभावित करता है और लकवा (paralysis) तक पैदा कर सकता है।
पोलियो वायरस Picornaviridae परिवार का सदस्य है और Enterovirus समूह से संबंधित है।
🔹 प्रकार:
Poliovirus के तीन प्रकार (serotypes) होते हैं:
Type 1 (Brunhilde strain) – सबसे आम और खतरनाक
Type 2 (Lansing strain)
Type 3 (Leon strain)
🔹 संक्रमण का तरीका:
वायरस मुख्य रूप से मल-मुख मार्ग (fecal-oral route) से फैलता है।
यानी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन लेने से।
यह वायरस आंतों में बढ़ता है और फिर तंत्रिका तंत्र (nervous system) तक पहुँचकर स्पाइनल कॉर्ड की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।
🔹 लक्षण:
सभी संक्रमित लोगों में लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जिनमें दिखते हैं, उनमें ये हो सकते हैं 👇
| प्रारंभिक लक्षण | गंभीर लक्षण |
|---|---|
| हल्का बुखार | मांसपेशियों में कमजोरी |
| गले में दर्द | लकवा (Paralysis) |
| उल्टी या थकान | चलने में कठिनाई |
| सिरदर्द | स्थायी विकलांगता |
कुछ मामलों में वायरस सांस की मांसपेशियों को भी प्रभावित कर देता है, जिससे साँस लेना मुश्किल हो जाता है — यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
🔹 बचाव:
🛡️ पोलियो से बचाव का सबसे शक्तिशाली तरीका है टीकाकरण (Vaccination):
ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) – मुँह से दी जाती है।
(Dr. Albert Sabin द्वारा विकसित)
इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV) – इंजेक्शन के रूप में दी जाती है।
(Dr. Jonas Salk द्वारा विकसित)
भारत में हर वर्ष “पल्स पोलियो अभियान” चलाया जाता है —
जिसमें बच्चों को “दो बूंद ज़िन्दगी की” दी जाती है 💧💧
🔹 वर्तमान स्थिति:
WHO के अनुसार भारत में 2014 में पोलियो को समाप्त (Polio-free) घोषित किया गया।
लेकिन कुछ देशों (जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान) में अब भी यह वायरस पाया जाता है।
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